-कोयले से चलने वाली भट्टियों की बढ़ी डिमाड
- लोहे के चूल्हे के भी बढ़े तेवर
- आगरा : घरेलू और कामर्शियल गैस की किल्लत के बीच अब विकल्प के तौर पर लोग कोयल से चलने वाली की भट्टी खरीद रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट और हलवाई की दुकान चलाने वाले हैं। वहीं गैस से चलने वाली भट्टियों की कीमत और डिमांड में गिरावट देखने को मिल रही है। लाेहामंडी क्वाटर क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक लोहे की भट्टी बनाने के कारखाने हैं।
- भट्टी बनाने वाले कारीगर सलीम बताते हैं कि जब से गैस की कमी हुई है तब से कोयला की भट्टी की डिमाड बढ़ गई है। जो लोग पहले गैस से चलते वाले भट्टी और तंदूर इस्तेमाल करते थे, वे अब कोयले वाली को प्रयोग कर रहे हैं। इस लिए इनके आडर मिल रहे हैं। डिमाड इतनी है कि हम आडर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। पहले जिस भट्टी की कीमत 80 से 85 रुपये किलोग्राम थी अब उसकी कीमत 200 से 250 रुपये है। सबसे ज्यादा होटल,रेस्टोरेंट और नाश्ते की दुकान चलाने वालों की हैं।
- वहीं लोहमंडी में दुकान चलाने वाले रमेश चंद अग्रवाल बताते हैं कि गैस की कमी जब से हुई है, तब से लोहे के छोटे चूल्हे की बिक्री बढ़ गई है।
- पहले तो मुश्किल से एक दो ही चूल्हे बिकते थे। लेकिन अब लोग विकल्प के तौर पर 8 से 10 लोहे के चूल्हे खरीद रहे हैं।
- ये वजन में हल्के होते हैं, कहीं भी रखकर आराम से इनका उपयोग कर सकते हैं । कीमत 250 से 300 रुपये है।
हर्ष शर्मा आगरा से एक युवा डिजिटल पत्रकार हैं, जो स्थानीय ख़बरों को सरल और सटीक तरीके से लोगों तक पहुँचाने का काम करते हैं। उनका फोकस ग्राउंड-रिपोर्टिंग, फैक्ट-चेकिंग और शहर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट को तेज़ी से पाठकों तक पहुँचाना है।
