- तेजाब नहीं झुलसा सका इरादे
- मेकअप आर्टिस्ट बन चेहरों को संवारेगी इलमा
आगरा : 3 साल पहले जमीनी विवाद में अपने ही चाचा ने इलमा के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया । उस समय इलमा को लगा वक्त थम गया है, जिंदगी रुक गई है, क्योंकि चेहरा खराब हो गया है । लेकिन आज वही इलमा मेकअप आर्टिस्ट बनकर दूसरों के चेहरे को सुंदरता की एक नई चमक देना चाहती है। शाहगंज कोलियाई की रहने वाली 19 वर्षीय इलमा के ऊपर उसके ही चाचा ने तेजाब उड़ेल दिया । इलमा बताती है कि उनके पिता और चाचा,दादा में घर को लेकर विवाद था । चाचा हमारे परिवार को मार कर घर हड़पना चाहते थे । एक रोज मैं मम्मी और भाईयों के साथ छत पर सो रहीं थी । रात दो बजे के करीब उनके चाचा रिजवान और फैजान ने हमारे ऊपर तेजाब उड़ले दिया । जिसमे भाइयों और मां के साथ मेरा चेहरा, हाथ, कान और सीना जल गया । चेहरा बुरी तरह जल गया । मेरी असली पहचान छिन गई थी । अस्पताल में कई महीनों तक इजाल चला । पिता आटो चलाते है। इतने रुपये नही थे कि सर्जरी करा सकें। बीच में ही इलाज छोड़ना पड़ा । पढ़ाई छूट गई । झुलसा हुआ चेहरा लेकर घर में ही कैद हो गई । बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती थी । ऐसा लगा कि जिंदगी खत्म हो गई ।
कुछ समय बाद शीरोज़ संस्था के संपर्क में आई । संस्था ने अपने खर्चे पर मेरे चेहरे की एम्स दिल्ली में चार साल में 12 सर्जरी कराई । काफी हद तक मेरा चेहरा ठीक हुआ। आत्मविश्वास वापस लौटा । अब में आगरा शीरोज़ हैंगआउट कैफे में काम करती हुं। इस काबिल हो गई हूं कि अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने मां-बाप का सहयोग कर रही हूं। मेरा सपना है कि मेरा चेहरा भले झुलस गया हो लेकिन मेकअप आर्टिस्ट बनकर दूसरों के चहरों को संवारना चाहती हूं । मेरे चाचा अभी भी फरार हैं । मैं चाहती हूं कि जल्द वे सभी पकड़े जाएं और उन्हें कड़ी सजा मिले ।
छाव फाउंडेशन के निदेशक आशीष शुक्ला बताते है कि कैफे में आठ सर्वाइवर काम कर रही हैं । हम इन्हें ट्रेनिंग देकर जीवन में आगे बढ़ना के लिए प्रयासरत हैं । आज भी कई सर्वाइवर न्याय के लिए न्यायालयों के चक्कर काट रही हैं। ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकद्दमा चला कर जल्द न्याय मिले ।
हर्ष शर्मा आगरा से एक युवा डिजिटल पत्रकार हैं, जो स्थानीय ख़बरों को सरल और सटीक तरीके से लोगों तक पहुँचाने का काम करते हैं। उनका फोकस ग्राउंड-रिपोर्टिंग, फैक्ट-चेकिंग और शहर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट को तेज़ी से पाठकों तक पहुँचाना है।
