- मेटा का टूल पेरेंटल सुपरविजन टूल अभिभावकों की चिंता करेगा कम
- बच्चों के इंस्टाग्राम, फेसबुक और सेंसेटिव पर रहेगी पेरेंट्स की नजर
- मां-बाप के अकाउंट से जुड सकेगा बच्चों का अकाउंट
आगरा : इंटरनेट मीडिया पर बच्चे किस-किस से बात करते हैं, किस प्लेटफार्म अधिक समय बिताते हैं। कैसा कंटेंट देख रहे हैं। आनलाइन होने वाले साइबर फ्रोड़ को लेकर अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ी हैं। मेटा का टूल अभिभावकों को की इस परेशानी को काफी हद तक आसान करेगा। मेटा ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेसेंजर पर ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ लांच किया है। यह जासूसी नहीं बल्कि बच्चों के साथ होने वाले आनलाइन साइबर फ्रोड़ से बचाने के लिए बेहद जरूरी टूल साबित हो रहा है। इससे अभिभावक अपने 12 से 17 वर्ष के बच्चों की सोशल मीडिया अकाउंट की एक्टिविटीज, स्क्रीन टाइम, चैट्स पर नजर रख सकेंगे। इस टूल की मदद से सेंसेटिव कंटेंट को कंट्रोल किया जा सकेगा। विशेषज्ञों मानना है कि देर तक मोबाइल फोन में व्यस्त रहना, जितना बच्चों के लिए नुकसानदेय है, उससे कहीं ज्यादा अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। देर रात तक टीनएजर्स मोबाइल चलाने और इंस्टाग्राम, फेसबुक पर रील्स स्क्रोलिंग में व्यस्त रहते हैं। यह आदत बच्चों के दिमाग, शरीर और बौद्धिक क्षमता पर असर डालती है। साथ ही साइबर फ्रोड़ से जुड़ी घटनाओं का डर लगा रहता है।
कैसे करता है नया टूल ।
आइटी एक्सपर्ट आलोक यादव बताते हैं कि मेटा यह फीचर बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी फीचर है।
फेसबुक और इंस्टाग्राम में एक फैमिली सेंटर नाम से एक टूल होता है। इसके जरिए अभिभावक बच्चे के मेटा अकाउंट्स पर नजर रख सकते हैं। इसी में पेरेंटल सुपरविजन टूल को जोड़ा गया है। इसमें बच्चे के अकाउंट पर रिक्वेस्ट भेजकर ऐड करना होगा। रिक्वेस्ट असेप्ट करने पर दोनों अकाउंट आपस में जुड़ जाएगें। इसके बाद अभिभावक बच्चे के अकाउंट पर निगरानी रख सकते हैंं।
इस टूल के जरिए अभिभावक बच्चों की स्क्रीन टाइम, रात में कितने बजे तक आनलाइन रहते हैं, कौन सा नया अकाउंट बच्चों ने फालो किया है। इसके अलावा किस को मैसेज भेज रहे है। किस से देर तक बात हो रही है। कैसा कंटेंट देख रहे हैं जैसी गतिविधि पर नजर रख सकते हैं। एआई के जरिए पता चलेगा किन विषयों में बच्चे की रूचि है। जब पेरेंट्स की निगरानी रहेगी तो आनलाइन खतरों को रोकने में भी मदद मिलेगी।
टाक
- मेरा 16 साल का बेटा है और ग्यारहवीं क्लास में पढ़ता है। देर रात तक फोन चलाने की उनकी आदत बन गई है। जिस तरह आनलाइन फ्रोड़ हो रहे हैं, डर लगा रहता है कि कहीं कुछ उसके साथ भी ना हो जाए। मेटा के इस फीचर के बारे में सुना है। – शिल्पी अग्रवाल, शाहगंज
- मेरा बेटा अभी सिर्फ 11 साल का है। स्कूल से आने के बाद पूरे दिन फोन में लगा रहता है। मना करने पर जिद करता है। ज्यादातर रील्स देखता है। मेटा के टूल से उसके एकाउंट को जोड़ लिया है। अब स्क्रीन कंट्रोल कर सकते हैं – सपना मेडतवाल, राजा मंडी
- टीनएजर्स इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर दोस्तों से चैट करते है। इस उम्र में बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।ज्यादा उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। अभिभावकों को बच्चों की गतिविधि पर रखनी चाहिए। – विशाल सिन्हा, मनोरोग विभागाध्यक्ष, एसएन मेडिकल कालेज
- आज कल आनलाइन साइबर फ्रोड़ बढ़ रहे हैं। हैकर टीनएजर्स को टारगेट करते हैं। एपीके फाइल भेज कर अकाउंट हैक कर लेते हैं। कई मामलों में बच्चों को डरा धमका कर पैसे मांगते हैं। इन बस से बच्चों को बचाने के लिए मेटा के इस टूल का पेरेंट्स उपयोग करें। – अमन कुमार, साइबर एक्सपर्ट, आवास विकास सेक्टर- 4
हर्ष शर्मा आगरा से एक युवा डिजिटल पत्रकार हैं, जो स्थानीय ख़बरों को सरल और सटीक तरीके से लोगों तक पहुँचाने का काम करते हैं। उनका फोकस ग्राउंड-रिपोर्टिंग, फैक्ट-चेकिंग और शहर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट को तेज़ी से पाठकों तक पहुँचाना है।
