नाक की एलर्जी से हर तीसरे मरीज को अस्थमा का ख़तरा!

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नाक की एलर्जी से हर तीसरे मरीज को अस्थमा का ख़तरा!

बहुत से लोग नाक की एलर्जी (Allergic Rhinitis) को मामूली बीमारी समझते हैं — लेकिन यह सिर्फ़ नाक तक सीमित नहीं रहती।
अध्ययनों से पता चला है कि नाक की एलर्जी वाले हर तीसरे मरीज में अस्थमा (Asthma) विकसित होने की संभावना रहती है।

🔹 नाक की एलर्जी क्या है?

नाक की एलर्जी तब होती है जब हमारी नाक की झिल्ली धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, फफूंदी या अन्य कणों के प्रति संवेदनशील हो जाती है। इससे नाक में खुजली, छींक, नाक बहना या बंद रहना जैसी समस्याएँ होती हैं।

नाक की एलर्जी

🔹 नाक और फेफड़ों का आपस में संबंध

नाक और फेफड़े दोनों ही हमारे श्वसन तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
जब नाक में बार-बार सूजन या एलर्जी होती है, तो वही सूजन फेफड़ों में भी पहुँच सकती है — जिससे धीरे-धीरे अस्थमा के लक्षण शुरू हो जाते हैं जैसे –

सीने में जकड़न

खांसी

साँस लेने में तकलीफ़

रात या सुबह-सुबह सांस फूलना

🔹 इलाज में लापरवाही क्यों ख़तरनाक है

यदि एलर्जी का सही इलाज समय पर न किया जाए, तो यह समस्या पुरानी होकर फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।
कई बार मरीज केवल सर्दी-जुकाम समझकर दवा लेते रहते हैं, पर असली वजह “एलर्जी” होती है जिसे पहचानना जरूरी है।

डॉ.रितु गुप्ता, प्रोफेसर/हैड ENT डिपार्टमेंट SN मेडिकल कॉलेज

🔹 क्या करें?

✅ ENT या एलर्जी विशेषज्ञ से परामर्श लें
✅ एलर्जन की पहचान के लिए स्किन प्रिक या RAST टेस्ट करवाएँ
✅ धूल, धुआँ और परागकण से बचाव करें
✅ समय पर दवा और नेज़ल स्प्रे का सही उपयोग करें

🔹 डॉक्टर की सलाह

नाक की एलर्जी का सही और नियमित इलाज करने से अस्थमा के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
याद रखें — “नाक की देखभाल, फेफड़ों की सुरक्षा।”

जब सामान्य दवाओं से राहत न मिले

कई बार नाक की एलर्जी के लक्षण इतने अधिक होते हैं कि सामान्य दवाओं से पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो पाता,
या फिर मरीज को बार-बार दवा लेनी पड़ती है ताकि लक्षण काबू में रहें।

ऐसे मामलों में, इम्यूनोथैरेपी (Immunotherapy) एक उत्कृष्ट और वैज्ञानिक विकल्प है।

🔹 इम्यूनोथैरेपी क्या है?

यह उपचार शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को प्रशिक्षित करता है ताकि वह एलर्जन (जैसे धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल आदि) को पहचानकर उन पर अत्यधिक प्रतिक्रिया न करे।
धीरे-धीरे शरीर की सहनशीलता बढ़ती है और एलर्जी के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी आती है।

🔹 लाभ

एलर्जी की जड़ पर असर करता है

दवाओं पर निर्भरता कम करता है

अस्थमा जैसी आगे की जटिलताओं से बचाव में मदद करता है

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